श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 90-91h
 
 
श्लोक  3.158.90-91h 
चतुर्विषाणा: पद्माभा: कुञ्जरा: सकरेणव:॥ ९०॥
एते वैदूर्यवर्णाभं क्षोभयन्ति महत् सर:।
 
 
अनुवाद
'देखो! कमल के समान कान्ति वाले और चार सुन्दर दाँतों वाले ये हाथी हथिनियों के साथ आ रहे हैं और वैदूर्यमणि के समान सुन्दर इस महान् सरोवर का मन्थन कर रहे हैं॥ 90 1/2॥
 
'Look here! These elephants with lotus-like luster and four beautiful teeth are coming along with the female elephants and are churning this great lake that looks as beautiful as a vaidurya gem.॥ 90 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)