श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 89-90h
 
 
श्लोक  3.158.89-90h 
वदन्ति मधुरा वाच: सर्वभूतमनोरमा:॥ ८९॥
भृङ्गराजोपचक्राश्च लोहपृष्ठा: पतत्त्रिण:।
 
 
अनुवाद
‘भृंगराज, उपचक्र (चक्रवाक) और लोहपृष्ठ (कंक) नामक पक्षी ऐसी मधुर भाषा बोलते हैं कि वे समस्त प्राणियों के मन को मोहित कर लेते हैं।
 
‘The birds named Bhringraj, Upachakra (Chakravaka) and Lohprishtha (Kank) speak in such sweet language that they captivate the minds of all creatures. 89 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)