श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 87-88h
 
 
श्लोक  3.158.87-88h 
रक्तपीतारुणा: पार्थ पादपाग्रगता: खगा:॥ ८७॥
परस्परमुदीक्षन्ते बहवो जीवजीवका:।
 
 
अनुवाद
'पार्थ! वृक्षों की ऊँची चोटियों पर बैठे लाल, गुलाबी और पीले रंग के चकोर पक्षी एक-दूसरे को देख रहे हैं।
 
‘Partha! Sitting on the high tops of the trees, the red, pink and yellow coloured Chakor birds are looking at each other. 87 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)