श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  3.158.86-87h 
चकोरा: शतपत्राश्च मत्तकोकिलसारिका:॥ ८६॥
पत्रिण: पुष्पितानेतान् संपतन्ति महाद्रुमान्।
 
 
अनुवाद
‘चकोर पक्षी, शतपत्र पक्षी, मदमस्त कोकिल और सारिका पक्षी आदि ये पक्षी इन विशाल पुष्पों से सुसज्जित वृक्षों की ओर कैसे उड़ रहे हैं?॥86 1/2॥
 
‘How are these birds like the Chakor bird, the Shatapatra bird, the intoxicated Kokil and the Sarika bird flying towards these huge flower-decorated trees?॥ 86 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)