श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 85-86h
 
 
श्लोक  3.158.85-86h 
शिखण्डिनीभिश्चरतां सहितानां शिखण्डिनाम्॥ ८५॥
नदतां शृणु निर्घोषं भीम पर्वतसानुषु।
 
 
अनुवाद
'भीम! इन पर्वत शिखरों पर मोरों के साथ विचरण करते हुए मोरों की मधुर ध्वनि सुनो।'
 
'Bhima! Listen to the sweet sound of the peacocks roaming around with the peacocks on these mountain peaks. 85 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)