श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.158.71 
तथा शालांस्तमालांश्च पाटलान् बकुलानपि।
माला इव समासक्ता: शैलानां शिखरेषु च॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार शाल, तमाल, पाताल और बकुल आदि वृक्ष उन पर्वत शिखरों पर धारण की हुई मालाओं के समान शोभायमान हो रहे थे।
 
Similarly, trees like Shaal, Tamal, Patal and Bakul etc. were looking beautiful like garlands worn on those mountain peaks. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)