vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना
»
श्लोक 71
श्लोक
3.158.71
तथा शालांस्तमालांश्च पाटलान् बकुलानपि।
माला इव समासक्ता: शैलानां शिखरेषु च॥ ७१॥
अनुवाद
इसी प्रकार शाल, तमाल, पाताल और बकुल आदि वृक्ष उन पर्वत शिखरों पर धारण की हुई मालाओं के समान शोभायमान हो रहे थे।
Similarly, trees like Shaal, Tamal, Patal and Bakul etc. were looking beautiful like garlands worn on those mountain peaks. 71.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×