उपर्युपरि शैलस्य गुहा: परमदुर्गमा:।
सुदुर्गमांस्ते सुबहून् सुखेनैवाभिचक्रमु:॥ ३४॥
धौम्य: कृष्णा च पार्थाश्च लोमशश्च महानृषि:।
अगच्छन् सहितास्तत्र न कश्चिदवहीयते॥ ३५॥
अनुवाद
उस पर्वत के ऊपर अनेक अत्यंत दुर्गम गुफाएँ और अनेक दुर्गम क्षेत्र थे। पांडव उन सबको आराम से पार करके आगे बढ़े। पुरोहित धौम्य, द्रौपदी, चारों पांडव और महर्षि लोमश - सभी साथ-साथ चल रहे थे। कोई भी पीछे नहीं छूटा।
There were many very inaccessible caves and many inaccessible areas on top of that mountain. The Pandavas crossed them all comfortably and moved forward. Priest Dhoumya, Draupadi, the four Pandavas and Maharishi Lomash - all of them were walking together. No one was left behind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥