श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 158: नर-नारायण-आश्रमसे वृषपर्वाके यहाँ होते हुए राजर्षि आर्ष्टिषेणके आश्रमपर जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.158.12 
ब्राह्मणास्तेऽन्वमोदन्त शिवेन कुशलेन च।
सुखोदर्कमिमं क्लेशमचिराद् भरतर्षभ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मणों ने उन्हें शुभ कामनाओं से नमस्कार करके उनकी मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति की स्वीकृति दी और कहा - 'हे भरतश्रेष्ठ! आज का दुःख शीघ्र ही सुखद भविष्य में बदल जाएगा॥ 12॥
 
Then the Brahmins greeted them with good wishes and approved of the fulfillment of their desired desires and said, 'O best of the Bharatas! Today's suffering will soon turn into a happy future.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)