Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.157.7-11: शत्रुघ्न! जब भीमसेन उन हिंसक पशुओं को मारने के लिए आश्रम से बाहर गए, तब उस राक्षस ने देखा कि घटोत्कच अपने सेवकों सहित किसी अज्ञात दिशा में चला गया है, लोमश आदि महान ऋषिगण ध्यान कर रहे हैं तथा अन्य तपस्वी अपनी कुटियाओं से स्नान करने और पुष्प लाने के लिए बाहर गए हैं। तब उस दुष्टात्मा ने दूसरा विशाल, विकराल और भयानक रूप धारण किया और पाण्डवों, द्रौपदी तथा तीनों पाण्डवों के भी समस्त अस्त्र-शस्त्र छीन लिए और वहाँ से चला गया। उस समय पाण्डुकुमार सहदेव ने बहुत प्रयत्न करके उस राक्षस के चंगुल से छूटकर अपने को छुड़ा लिया और महान पराक्रम दिखाकर उसकी तलवार म्यान से निकाल ली। तब महाबली भीमसेन जिस दिशा से गए थे, उसी दिशा में गए और उसे जोर-जोर से पुकारने लगे। | mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रुघ्न! जब भीमसेन उन हिंसक पशुओं को मारने के लिए आश्रम से बाहर गए, तब उस राक्षस ने देखा कि घटोत्कच अपने सेवकों सहित किसी अज्ञात दिशा में चला गया है, लोमश आदि महान ऋषिगण ध्यान कर रहे हैं तथा अन्य तपस्वी अपनी कुटियाओं से स्नान करने और पुष्प लाने के लिए बाहर गए हैं। तब उस दुष्टात्मा ने दूसरा विशाल, विकराल और भयानक रूप धारण किया और पाण्डवों, द्रौपदी तथा तीनों पाण्डवों के भी समस्त अस्त्र-शस्त्र छीन लिए और वहाँ से चला गया। उस समय पाण्डुकुमार सहदेव ने बहुत प्रयत्न करके उस राक्षस के चंगुल से छूटकर अपने को छुड़ा लिया और महान पराक्रम दिखाकर उसकी तलवार म्यान से निकाल ली। तब महाबली भीमसेन जिस दिशा से गए थे, उसी दिशा में गए और उसे जोर-जोर से पुकारने लगे।
Shatrughan! When Bhimasena went out of the hermitage to kill the ferocious animals, that demon saw that Ghatotkacha along with his servants had gone in some unknown direction, that great sages like Lomash were meditating and other ascetics had gone out of their huts to take bath and bring flowers. Then that evil spirit assumed another huge, monstrous and fearful form and took away all the weapons of the Pandavas, Draupadi and the three Pandavas as well and left from there. At that time, Pandukumar Sahadeva tried hard and got free from the grip of that demon and by showing great valour, he got his sword out of the sheath from him. Then the mighty Bhimasena went in the same direction by which he had gone and started calling him loudly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥