Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.157.67: तत्पश्चात् भीमसेन ने अपनी पाँच अंगुलियों वाली मुट्ठी पाँच सिर वाले सर्प के समान बाँधी और उस राक्षस की गर्दन पर बड़े जोर से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.157.67 
तत: संहृत्य मुष्टिं तु पञ्चशीर्षमिवोरगम्।
वेगेनाभ्यहनद् भीमो राक्षसस्य शिरोधराम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीमसेन ने अपनी पाँच अंगुलियों वाली मुट्ठी पाँच सिर वाले सर्प के समान बाँधी और उस राक्षस की गर्दन पर बड़े जोर से प्रहार किया।
 
Thereafter Bhimasena clenched his five-fingered fist like a five-headed serpent and struck the demon on the neck with great force. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)