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mahabharat 3.157.58: वे दोनों बहुत बलवान थे। वे दो बादलों की तरह गरजते, पेड़ों को तोड़ते और एक-दूसरे पर आक्रमण करते थे। 58   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.157.58 
आरुज्यारुज्य तौ वृक्षानन्योन्यमभिजघ्नतु:।
जीमूताविव गर्जन्तौ निनदन्तौ महाबलौ॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों बहुत बलवान थे। वे दो बादलों की तरह गरजते, पेड़ों को तोड़ते और एक-दूसरे पर आक्रमण करते थे। 58
 
Both of them were very strong. They roared like two clouds and broke trees and attacked each other. 58
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)