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mahabharat 3.157.55: फिर उसने युधिष्ठिर से कहा, 'महाराज! मैं अपनी, अपने समस्त भाइयों की, धर्म की, पुण्यकर्मों की और यज्ञ की शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं इस राक्षस को अवश्य मार डालूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.157.55 
आत्मना भ्रातृभिश्चैव धर्मेण सुकृतेन च।
इष्टेन च शपे राजन् सूदयिष्यामि राक्षसम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने युधिष्ठिर से कहा, 'महाराज! मैं अपनी, अपने समस्त भाइयों की, धर्म की, पुण्यकर्मों की और यज्ञ की शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं इस राक्षस को अवश्य मार डालूँगा।'
 
Then he said to Yudhishthira, 'Maharaj! I swear by myself, all my brothers, Dharma, pious deeds and Yajna that I will surely kill this demon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)