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mahabharat 3.157.54: परन्तु कुन्तीपुत्र भीमसेन ने हँसकर उन दोनों को रोक दिया और कहा - 'इस राक्षस के लिए मैं अकेला ही पर्याप्त हूँ। तुम सब चुपचाप देखते रहो।'   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.157.54 
न्यवारयत् तौ प्रहसन् कुन्तीपुत्रो वृकोदर:।
शक्तोऽहं राक्षसस्येति प्रेक्षध्वमिति चाब्रवीत्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
परन्तु कुन्तीपुत्र भीमसेन ने हँसकर उन दोनों को रोक दिया और कहा - 'इस राक्षस के लिए मैं अकेला ही पर्याप्त हूँ। तुम सब चुपचाप देखते रहो।'
 
But Kunti's son Bhimasena laughed and stopped them both and said - 'I alone am enough for this demon. You all keep watching quietly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)