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mahabharat 3.157.48: उस समय उनके होठ क्रोध से काँप रहे थे। उन्होंने भीमसेन को उत्तर दिया, "हे पापी! मुझसे कोई भूल नहीं हुई। मैंने तुम्हारे लिए ही तो विलम्ब किया था।"   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.157.48 
अब्रवीच्च पुनर्भीमं रोषात् प्रस्फुरिताधर:।
न मे मूढा दिश: पाप त्वदर्थं मे विलम्बितम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उस समय उनके होठ क्रोध से काँप रहे थे। उन्होंने भीमसेन को उत्तर दिया, "हे पापी! मुझसे कोई भूल नहीं हुई। मैंने तुम्हारे लिए ही तो विलम्ब किया था।"
 
At that time his lips were quivering with anger. He replied to Bhimasena saying- 'O sinner! I was not mistaken. I had delayed for you only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)