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mahabharat 3.157.47: भीमसेन के वचन सुनकर वह राक्षस भयभीत हो गया और काल के उकसाने पर सबको छोड़कर युद्ध के लिए तैयार हो गया ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.157.47 
एवमुक्तस्तु भीमेन राक्षस: कालचोदित:।
भीत उत्सृज्य तान् सर्वान् युद्धाय समुपस्थित:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के वचन सुनकर वह राक्षस भयभीत हो गया और काल के उकसाने पर सबको छोड़कर युद्ध के लिए तैयार हो गया ॥47॥
 
At Bhimasena's words the demon became frightened and leaving them all, at the instigation of Kala, prepared himself for the battle. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)