Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.157.38-40: उस समय सहदेव भूमि पर खड़े होकर राक्षस को दोष दे रहे थे और वह मूर्ख राक्षस मार्ग से भटककर वहीं घूम रहा था। वह बहुत समय से अपनी बुद्धि खो चुका था। भगवान ने ही उसे वहाँ रोका था। अपने भाइयों और द्रौपदी का अपहरण होते देख महाबली भीमसेन क्रोधित होकर जटासुर से बोले - 'रे पापी! जब तू अपने अस्त्रों की परीक्षा कर रहा था, तब मैंने तुझे पहले ही पहचान लिया था।' 38-40. | mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय सहदेव भूमि पर खड़े होकर राक्षस को दोष दे रहे थे और वह मूर्ख राक्षस मार्ग से भटककर वहीं घूम रहा था। वह बहुत समय से अपनी बुद्धि खो चुका था। भगवान ने ही उसे वहाँ रोका था। अपने भाइयों और द्रौपदी का अपहरण होते देख महाबली भीमसेन क्रोधित होकर जटासुर से बोले - 'रे पापी! जब तू अपने अस्त्रों की परीक्षा कर रहा था, तब मैंने तुझे पहले ही पहचान लिया था।' 38-40.
At that time Sahadeva was standing on the ground and was blaming the demon and that foolish demon was roaming around there, having lost his way. He had lost his wisdom for a long time. It was the God who had stopped him there. Seeing his brothers and Draupadi being kidnapped, the mighty Bhimsena became furious and said to Jatasura - 'O sinner! I had recognized you earlier when you were testing your weapons. 38-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥