Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.157.30-33: 'अगला शुभ मुहूर्त आते ही यह राक्षस प्राण त्याग देगा।' सहदेव ने उस मूर्ख राक्षस को देखकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से कहा - 'हे राजन! क्षत्रिय के लिए युद्ध में शत्रु का सामना करते हुए अथवा उसे परास्त करते हुए प्राण त्यागने से बढ़कर और क्या श्रेष्ठ कर्म हो सकता है? हे राजन! इस प्रकार वह हमें मार सकता है अथवा हम उसे युद्ध करते हुए मार सकते हैं। हे महाबाहु राजन! यही क्षत्रिय धर्म के अनुकूल समय और स्थान है। यही सच्ची वीरता प्रदर्शित करने का समय है।' | mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'अगला शुभ मुहूर्त आते ही यह राक्षस प्राण त्याग देगा।' सहदेव ने उस मूर्ख राक्षस को देखकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से कहा - 'हे राजन! क्षत्रिय के लिए युद्ध में शत्रु का सामना करते हुए अथवा उसे परास्त करते हुए प्राण त्यागने से बढ़कर और क्या श्रेष्ठ कर्म हो सकता है? हे राजन! इस प्रकार वह हमें मार सकता है अथवा हम उसे युद्ध करते हुए मार सकते हैं। हे महाबाहु राजन! यही क्षत्रिय धर्म के अनुकूल समय और स्थान है। यही सच्ची वीरता प्रदर्शित करने का समय है।'
'As soon as this next auspicious moment arrives, this demon will lose his life.' Sahadeva looking at that foolish demon said to Yudhishthira, son of Kunti - 'O King! What can be a better deed for a Kshatriya than to sacrifice his life while facing the enemy in battle or to defeat the enemy. O King! In this way, he may kill us or we may kill him while fighting. O mighty-armed king! This is the time and place conducive to Kshatriya Dharma. This is the time to display true valour.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥