श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.157.28 
स तु भाराभिभूतात्मा न तथा शीघ्रगोऽभवत्।
अथाब्रवीद् द्रौपदीं च नकुलं च युधिष्ठिर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उसका शरीर भार से दबने लगा, अतः अब वह पहले की भाँति तीव्र गति से नहीं चल सकता था। तब युधिष्ठिर ने नकुल और द्रौपदी से कहा -॥28॥
 
His body started getting pressed down by the weight, so now he could not walk as fast as before. Then Yudhishthira said to Nakul and Draupadi -॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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