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mahabharat 3.157.18: क्योंकि जब मनुष्य हवि और नैवेद्य से उनकी पूजा करते हैं, तब वे बढ़ते हैं। हे राक्षस! हम राष्ट्र के रक्षक और संरक्षक हैं॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.157.18 
पूज्यमानाश्च वर्धन्ते हव्यकव्यैर्यथाविधि।
वयं राष्ट्रस्य गोप्तारो रक्षितारश्च राक्षस॥ १८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि जब मनुष्य हवि और नैवेद्य से उनकी पूजा करते हैं, तब वे बढ़ते हैं। हे राक्षस! हम राष्ट्र के रक्षक और संरक्षक हैं॥18॥
 
‘Because when humans worship them with oblations and offerings, they increase. O demon! We are the protectors and guardians of the nation.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)