Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.157.14-16: 'राक्षस धर्म के मूल हैं। वे धर्म का अच्छा ज्ञान रखते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए तुम्हें हमारे निकट रहना चाहिए। दैत्य! देवता, ऋषि, सिद्ध, पितर, गंधर्व, सर्प, राक्षस, पशु, तिर्यग्ज्ञान के सभी जीव-जंतु तथा कीट-पतंगे, चींटियाँ आदि भी अपनी जीविका के लिए मनुष्यों पर निर्भर रहते हैं। इस दृष्टि से तुम भी मनुष्यों से ही जीविका चलाते हो। 14-16॥ | mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'राक्षस धर्म के मूल हैं। वे धर्म का अच्छा ज्ञान रखते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए तुम्हें हमारे निकट रहना चाहिए। दैत्य! देवता, ऋषि, सिद्ध, पितर, गंधर्व, सर्प, राक्षस, पशु, तिर्यग्ज्ञान के सभी जीव-जंतु तथा कीट-पतंगे, चींटियाँ आदि भी अपनी जीविका के लिए मनुष्यों पर निर्भर रहते हैं। इस दृष्टि से तुम भी मनुष्यों से ही जीविका चलाते हो। 14-16॥
‘Demons are the origin of religion. They have good knowledge of religion. Considering all these things you should stay close to us. Demon! Gods, sages, Siddhas, ancestors, Gandharvas, snakes, demons, animals, all the creatures of Tirgyogya and even insects, ants etc. depend on humans for their livelihood. From this point of view, you also earn your living from humans. 14-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥