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mahabharat 3.157.13: जहाँ कहीं भी मनुष्य, पशु-पक्षी आदि अन्य प्राणी हैं, वे सब धर्म का ध्यान रखते हैं। राक्षस लोग तो विशेष रूप से धर्म का ही ध्यान रखते हैं (पशु-पक्षियों से भी अधिक)।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 157: जटासुरके द्वारा द्रौपदीसहित युधिष्ठिर,नकुल, सहदेवका हरण तथा भीमसेनद्वारा जटासुरका वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.157.13 
येऽन्ये क्वचिन्मनुष्येषु तिर्यग्योनिगताश्च ये।
धर्मं ते समवेक्षन्ते रक्षांसि च विशेषत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जहाँ कहीं भी मनुष्य, पशु-पक्षी आदि अन्य प्राणी हैं, वे सब धर्म का ध्यान रखते हैं। राक्षस लोग तो विशेष रूप से धर्म का ही ध्यान रखते हैं (पशु-पक्षियों से भी अधिक)।॥13॥
 
‘Wherever there are other beings in the form of human beings or animals or birds, they all keep an eye on Dharma. Demons especially think about Dharma (even more than animals and birds).॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)