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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 156: पाण्डवोंका आकाशवाणीके आदेशसे पुन: नर-नारायणाश्रममें लौटना
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श्लोक 9
श्लोक
3.156.9
गङ्गाद्वारमतिक्रम्य बहव: पर्वता: शुभा:।
हिमवान् पर्वतश्चैव नानाद्विजगणायुत:॥ ९॥
अनुवाद
‘गंगाद्वार (हरिद्वार) पार करके उन्होंने अनेक शुभ पर्वत देखे और बहुत से ब्राह्मणों के साथ हिमालय भी देखा।॥9॥
‘After crossing Gangadwar (Haridwar) he saw many auspicious mountains and also saw the Himalayas accompanied by a large number of Brahmins.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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