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mahabharat 3.156.18: आकाश से आती हुई उस दिव्य वाणी को सुनकर सब लोग आश्चर्यचकित हो गए। ऋषि, ब्राह्मण और विशेषतः राजा लोग बहुत आश्चर्यचकित हुए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.156: पाण्डवोंका आकाशवाणीके आदेशसे पुन: नर-नारायणाश्रममें लौटना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 156: पाण्डवोंका आकाशवाणीके आदेशसे पुन: नर-नारायणाश्रममें लौटना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.156.18 
श्रुत्वा तु दिव्यामाकाशाद् वाचं सर्वे विसिस्मियु:।
ऋषीणां ब्राह्मणानां च पार्थिवानां विशेषत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आकाश से आती हुई उस दिव्य वाणी को सुनकर सब लोग आश्चर्यचकित हो गए। ऋषि, ब्राह्मण और विशेषतः राजा लोग बहुत आश्चर्यचकित हुए॥18॥
 
Everyone was astonished to hear that divine voice from the sky. The sages, Brahmins and especially the kings were most surprised.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)