| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 156: पाण्डवोंका आकाशवाणीके आदेशसे पुन: नर-नारायणाश्रममें लौटना » श्लोक 17 |
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| | | | श्लोक 3.156.17  | एतस्मिन्नन्तरे वायुर्दिव्यगन्धवह: शुचि:।
सुखप्रह्लादन: शीत: पुष्पवर्षं ववर्ष च॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | उसी समय वहाँ दिव्य सुगन्ध से युक्त शीतल, सुख और आनन्द देने वाली पवित्र वायु बहने लगी और साथ ही वहाँ पुष्पों की वर्षा होने लगी॥17॥ | | | | At the same time, a holy breeze filled with divine fragrance started blowing, which was cool and gave happiness and joy. Along with that, a rain of flowers started there.॥ 17॥ | | ✨ ai-generated | | |
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