श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 156: पाण्डवोंका आकाशवाणीके आदेशसे पुन: नर-नारायणाश्रममें लौटना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.156.15 
तस्माद् यास्यसि कौन्तेय सिद्धचारणसेवितम्।
बहुपुष्पफलं रम्यमाश्रमं वृषपर्वण:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीकुमार! वहाँ से तुम वृषपर्वा के रमणीय आश्रम में जाओ, जो प्रचुर फल-फूलों से परिपूर्ण है, जहाँ सिद्ध और चारण निवास करते हैं॥15॥
 
'Kuntikumar! From there you go to the delightful ashram of Vrishparva, full of abundant fruits and flowers, where Siddhas and Charanas reside. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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