श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 156: पाण्डवोंका आकाशवाणीके आदेशसे पुन: नर-नारायणाश्रममें लौटना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.156.13 
वैशम्पायन उवाच
एवं ब्रुवति राजेन्द्रे वागुवाचाशरीरिणी।
न शक्यो दुर्गमो गन्तुमितो वैश्रवणाश्रमात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - महाराज युधिष्ठिर के ऐसा कहते ही आकाशवाणी हुई - 'कुबेर के इस आश्रम से आगे जाना संभव नहीं है। यह मार्ग अत्यंत कठिन है।॥13॥
 
Vaishampayana says - As soon as Maharaja Yudhishthira said this, a voice from the sky said - 'It is not possible to go beyond this hermitage of Kubera. This path is extremely difficult.॥ 13॥
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