Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.155.24-25: उसके तट पर मैंने महाज्ञानी भीम को तथा उसके द्वारा मारे गए विशाल नेत्रों वाले यक्षों को भी देखा - जिनके शरीर, नेत्र, भुजाएँ और जाँघें फटी हुई थीं, गर्दनें कुचली हुई थीं; महात्मा भीम उस सरोवर के तट पर खड़े थे।।24-25।। | mahabharat अध्याय 3.155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं च भीमं महात्मानं तस्यास्तीरे मनस्विनम्।
ददृशुर्निहतांश्चैव यक्षांश्च विपुलेक्षणान्॥ २४॥
भिन्नकायाक्षिबाहूरून् संचूर्णितशिरोधरान्।
तं च भीमं महात्मानं तस्यास्तीरे व्यवस्थितम्॥ २५॥
अनुवाद
उसके तट पर मैंने महाज्ञानी भीम को तथा उसके द्वारा मारे गए विशाल नेत्रों वाले यक्षों को भी देखा - जिनके शरीर, नेत्र, भुजाएँ और जाँघें फटी हुई थीं, गर्दनें कुचली हुई थीं; महात्मा भीम उस सरोवर के तट पर खड़े थे।।24-25।।
On its bank I saw the great Bhima, the wise man, and also the large-eyed Yakshas killed by him - whose bodies, eyes, arms and thighs were torn apart, necks were crushed; Mahatma Bhima was standing on the bank of that lake. 24-25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥