Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.155.18-19: 'ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि भीमसेन यहाँ से बहुत दूर चले गए हैं, ऐसा मेरा विश्वास है। क्योंकि उन्हें गए हुए बहुत समय हो गया है और वे वायु के समान वेगवान तथा इस पृथ्वी को पार करने में गरुड़ के समान तीव्र हैं। वे आकाश में छलांग लगा सकते हैं और जहाँ चाहें वहाँ कूद सकते हैं।॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 3.155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यक्तं दूरमितो भीम: प्रविष्ट इति मे मति:।
चिरं च तस्य कालोऽयं स च वायुसमो जवे॥ १८॥
तरस्वी वैनतेयस्य सदृशो भुवि लंघने।
उत्पतेदपि चाकाशं निपतेच्च यथेच्छकम्॥ १९॥
अनुवाद
'ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि भीमसेन यहाँ से बहुत दूर चले गए हैं, ऐसा मेरा विश्वास है। क्योंकि उन्हें गए हुए बहुत समय हो गया है और वे वायु के समान वेगवान तथा इस पृथ्वी को पार करने में गरुड़ के समान तीव्र हैं। वे आकाश में छलांग लगा सकते हैं और जहाँ चाहें वहाँ कूद सकते हैं।॥18-19॥
‘It seems clear that Bhimasena has gone very far from here, this is my belief. Because it has been a long time since he left and he is as fast as the wind and as swift as Garuda in crossing this earth. He can leap in the sky and jump anywhere he wants.॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥