Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.155.17: हे देवताओं के समान तेजस्वी घटोत्कच! तुम्हारे साथी राक्षस इन ब्राह्मणों को अपने कंधों पर उठा ले चलें, क्योंकि ये थके हुए और दुर्बल हैं, और तुम द्रौपदी को भी अपने साथ ले जाओ॥17॥ | mahabharat अध्याय 3.155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहन्तु राक्षसा विप्रान् यथाश्रान्तान् यथाकृशान्।
त्वमप्यमरसंकाश वह कृष्णां घटोत्कच॥ १७॥
अनुवाद
हे देवताओं के समान तेजस्वी घटोत्कच! तुम्हारे साथी राक्षस इन ब्राह्मणों को अपने कंधों पर उठा ले चलें, क्योंकि ये थके हुए और दुर्बल हैं, और तुम द्रौपदी को भी अपने साथ ले जाओ॥17॥
'Ghatotkacha, who is as radiant as the gods! Your fellow demons should carry these Brahmins on their shoulders, as they are tired and weak, and you also take Draupadi with you.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥