श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.155.16 
उक्तस्त्वेवं तया राजा यमाविदमथाब्रवीत्।
गच्छाम सहितास्तूर्णं येन यातो वृकोदर:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी के ऐसा कहने पर राजा युधिष्ठिर ने नकुल और सहदेव से कहा - 'अब हम लोग भी शीघ्रतापूर्वक भीमसेन के मार्ग पर चलें।॥ 16॥
 
Upon Draupadi saying this, King Yudhishthira said to Nakula and Sahadeva, 'Now let us also together quickly proceed on the path taken by Bhimasena.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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