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mahabharat 3.155.13-14: द्रौपदी बोली, 'हे राजन! मैंने आज वायु द्वारा लाए गए सुगन्धित पुष्पों को प्रसन्नतापूर्वक भीमसेन को दे दिया तथा वीर योद्धा से यह भी कहा कि यदि तुम्हें ऐसे बहुत से पुष्प दिखाई दें, तो उन सबको ले आओ और शीघ्र ही यहाँ लौट आओ।'   |   mahabharat अध्याय 3.155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  3.155.13-14 
द्रौपद्युवाच
यत् तत् सौगन्धिकं राजन्नाहृतं मातरिश्वना।
तन्मया भीमसेनस्य प्रीतयाद्योपपादितम्॥ १३॥
अपि चोक्तो मया वीरो यदि पश्येर्बहून्यपि।
तानि सर्वाण्युपादाय शीघ्रमागम्यतामिति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, 'हे राजन! मैंने आज वायु द्वारा लाए गए सुगन्धित पुष्पों को प्रसन्नतापूर्वक भीमसेन को दे दिया तथा वीर योद्धा से यह भी कहा कि यदि तुम्हें ऐसे बहुत से पुष्प दिखाई दें, तो उन सबको ले आओ और शीघ्र ही यहाँ लौट आओ।'
 
Draupadi said, 'O King! I gladly gave the fragrant flowers that the wind had brought today to Bhimasena and also told the brave warrior that if you see many such flowers, then bring them all and return here quickly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)