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mahabharat 3.155.12: ‘वे सब ओर से भयंकर भय प्रकट करते हुए प्रकट हो रहे हैं।’ धर्मराज युधिष्ठिर को इस प्रकार बोलते देख, मनोहर, बुद्धिमान रानी द्रौपदी ने उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा से मनमोहक मुस्कान के साथ इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 3.155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 155: भयंकर उत्पात देखकर युधिष्ठिर आदिकी चिन्ता और सबका गन्धमादन-पर्वतपर सौगन्धिकवनमें भीमसेनके पास पहुँचना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.155.12 
दर्शयन्तो भयं तीव्रं प्रादुर्भूता: समन्तत:।
तं तथावादिनं कृष्णा प्रत्युवाच मनस्विनी।
प्रिया प्रियं चिकीर्षन्ती महिषी चारुहासिनी॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘वे सब ओर से भयंकर भय प्रकट करते हुए प्रकट हो रहे हैं।’ धर्मराज युधिष्ठिर को इस प्रकार बोलते देख, मनोहर, बुद्धिमान रानी द्रौपदी ने उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा से मनमोहक मुस्कान के साथ इस प्रकार कहा।
 
'They are appearing all around, displaying intense fear.' Seeing Dharmaraja Yudhishthir talking in this manner, the charming, intelligent Queen Draupadi, with a charming smile, replied thus with a desire to please him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)