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mahabharat 3.154.7: भीमसेन! तुम्हें अपने बल का इतना अभिमान है कि तुम कुबेर की भी उपेक्षा करके यहाँ से कमल-पुष्प चुराना चाहते हो। ऐसी दशा में तुम अपने को धर्मराज का भाई कैसे कह सकते हो?॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.154.7 
तमनादृत्य पद्मानि जिहीर्षसि बलादृत:।
धर्मराजस्य चात्मानं ब्रवीषि भ्रातरं कथम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन! तुम्हें अपने बल का इतना अभिमान है कि तुम कुबेर की भी उपेक्षा करके यहाँ से कमल-पुष्प चुराना चाहते हो। ऐसी दशा में तुम अपने को धर्मराज का भाई कैसे कह सकते हो?॥7॥
 
Bhimsena! You are so proud of your strength that you are disregarding Kubera and want to steal the lotus flowers from here. In such a condition how can you call yourself the brother of Dharmaraj?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)