श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.154.26 
तेषां वचस्तत् तु निशम्य देव:
प्रहस्य रक्षांसि ततोऽभ्युवाच।
गृह्णातु भीमो जलजानि कामात्
कृष्णानिमित्तं विदितं ममैतत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उनकी बातें सुनकर महाबली कुबेर हँसे और राक्षसों से बोले, "मैं यह जानता हूँ। भीमसेन अपनी इच्छानुसार द्रौपदी के लिए कमल ले लें।"
 
Hearing their words, the great Kubera laughed and said to the demons, "I know this. Let Bhimsena take the lotus as per his wish for Draupadi." 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)