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mahabharat 3.154.22: भीमसेन के प्रहारों से घायल होकर क्रोधवश नामक राक्षस अपनी मूर्छा खो बैठा, जिससे उसके पैर उखड़ गए और वह तुरन्त ही आकाश में उड़कर कैलाश पर्वत की चोटियों पर जा पहुंचा।   |   mahabharat अध्याय 3.154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.154.22 
विदीर्यमाणास्तत एव तूर्ण-
माकाशमास्थाय विमूढसंज्ञा:।
कैलासशृङ्गाण्यभिदुद्रुवुस्ते
भीमार्दिता: क्रोधवशा: प्रभग्ना:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के प्रहारों से घायल होकर क्रोधवश नामक राक्षस अपनी मूर्छा खो बैठा, जिससे उसके पैर उखड़ गए और वह तुरन्त ही आकाश में उड़कर कैलाश पर्वत की चोटियों पर जा पहुंचा।
 
Being wounded and afflicted by Bhimasena's blows, the demon named Krodhavash had lost his senses. Hence, his feet got uprooted and he immediately flew from there into the sky and fled to the peaks of Kailash.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)