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mahabharat 3.154.21: भीमसेन का पराक्रम, शारीरिक बल, विद्या और बाहुबल देखकर वे वीर राक्षस संगठित होकर भी उसके आक्रमण का सामना न कर सके और सब ओर से युद्ध छोड़कर सहसा पीछे हट गए॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.154.21 
ते तस्य वीर्यं च बलं च दृष्ट्वा
विद्याबलं बाहुबलं तथैव।
अशक्नुवन्त: सहितं समन्ताद्
द्रुतं प्रवीरा: सहसा निवृत्ता:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन का पराक्रम, शारीरिक बल, विद्या और बाहुबल देखकर वे वीर राक्षस संगठित होकर भी उसके आक्रमण का सामना न कर सके और सब ओर से युद्ध छोड़कर सहसा पीछे हट गए॥ 21॥
 
Seeing Bhimasena's valour, physical strength, knowledge and arm power, those brave demons, even if organized together, were unable to withstand his onslaught and suddenly abandoned the fight from all sides and retired.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)