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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.154.13 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त्वा राक्षसान् सर्वान् भीमसेनो ह्यमर्षण:।
व्यगाहत महाबाहुर्नलिनीं तां महाबल:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! समस्त राक्षसों से ऐसा कहकर महाबली भीमसेन क्रोध में भरकर सरोवर में प्रवेश करने लगे।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Having said this to all the demons, the mighty Bhimasena, filled with anger, began to enter the lake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)