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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 154: भीमसेनके द्वारा क्रोधवश नामक राक्षसोंकी पराजय और द्रौपदीके लिये सौगन्धिक कमलोंका संग्रह करना
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श्लोक 11
श्लोक
3.154.11
इयं च नलिनी रम्या जाता पर्वतनिर्झरे।
नेयं भवनमासाद्य कुबेरस्य महात्मन:॥ ११॥
अनुवाद
यह सुन्दर सरोवर पर्वतीय झरनों से निकला है; यह महामनस्वी कुबेर के घर में नहीं है ॥11॥
This beautiful lake has emerged from mountain springs; it is not in the home of the great-minded Kubera. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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