श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 153: क्रोधवश नामक राक्षसोंका भीमसेनसे सरोवरके निकट आनेका कारण पूछना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.153.16 
मुनिवेषधरश्चैव सायुधश्चैव लक्ष्यसे।
यदर्थमभिसम्प्राप्तस्तदाचक्ष्व महामते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महामते! आपने तो मुनि का वेश धारण किया है; परन्तु आप तो अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित प्रतीत होते हैं। आप यहाँ क्यों आये हैं? मुझे बताइए॥16॥
 
‘Mahamate! You have worn the attire of a sage; but you appear to be well-equipped with weapons. Why have you come here?’ Tell me.॥ 16॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां सौगन्धिकाहरणे त्रिपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें सौगन्धिकाहरणविषयक एक सौ तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५३॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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