श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 152: भीमसेनका सौगन्धिक वनमें पहुँचना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.152.9 
कृतपद्माञ्जलिपुटा मत्तषट्पदसेविता:।
प्रियतीर्थवना मार्गे पद्मिनी: समतिक्रमन्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में उन्हें अनेक ऐसे तालाब पार करने पड़े जिनके किनारे और वन देखने में बड़े ही रमणीय थे। मदमस्त मधुमक्खियाँ उन पर भोजन करती थीं और वे कमल की कलियों से ऐसे सुशोभित प्रतीत होते थे, मानो उन्होंने कमलों को अपने हाथों में जोड़ रखा हो॥9॥
 
On the way they had to cross many such ponds whose banks and forests were very pleasant to look at. Intoxicated bees used to feast on them and they appeared to be decorated with blooming lotus buds, as if they had folded their hands with lotuses.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)