श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 152: भीमसेनका सौगन्धिक वनमें पहुँचना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.152.8 
कुसुमानन्तगन्धैश्च ताम्रपल्लवकोमलै:।
याच्यमान इवारण्ये द्रुमैर्मारुतकम्पितै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
फूलों की अनंत सुगन्ध से परिपूर्ण और लाल पत्तों के कारण कोमल प्रतीत होने वाले वे वृक्ष वायु के वेग से झूमते हुए ऐसे प्रतीत होते थे मानो उस वन में भीमसेन से याचना कर रहे हों ॥8॥
 
The trees, filled with the infinite fragrance of flowers and appearing tender due to their red leaves, swaying in the force of the wind, seemed as if they were pleading to Bhimasena in that forest. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)