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श्लोक  3.152.5 
मत्तवारणयूथानि पङ्कक्लिन्नानि भारत।
वर्षतामिव मेघानां वृन्दानि ददृशे तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय बहते हुए कीचड़ में भीगे हुए मदमस्त हाथियों के झुंड वर्षा करने वाले बादलों के समूह के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
At that time, the herds of intoxicated elephants, soaked in the flowing mud, looked like a group of rain-bearing clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)