श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 152: भीमसेनका सौगन्धिक वनमें पहुँचना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  3.152.3-4 
स तानि रमणीयानि वनान्युपवनानि च।
विलोकयामास तदा सौगन्धिकवनेप्सया॥ ३॥
फुल्लद्रुमविचित्राणि सरांसि सरितस्तथा।
नानाकुसुमचित्राणि पुष्पितानि वनानि च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुगन्धित वन में पहुँचने की इच्छा से उन्होंने उस समय वहाँ के समस्त सुन्दर वनों और उद्यानों का अवलोकन किया। उन्होंने अनेक सरोवरों और नदियों को देखा, जो सुविकसित वृक्षों के कारण अत्यन्त सुन्दर दिख रहे थे। उन्होंने पुष्पों से भरे हुए वनों को भी देखा, जो नाना प्रकार के पुष्पों के खिलने के कारण अद्भुत प्रतीत हो रहे थे। ॥3-4॥
 
With the desire to reach the fragrant forest, he observed all the beautiful forests and gardens there at that time. He looked at many lakes and rivers which were looking very beautiful due to the well-developed trees and also observed the forests full of flowers which looked wonderful due to the blooming of many kinds of flowers. ॥ 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)