अनुस्मरन् वपुस्तस्य श्रियं चाप्रतिमां भुवि।
माहात्म्यमनुभावं च स्मरन् दाशरथेर्ययौ॥ २॥
अनुवाद
मार्ग में उन्हें हनुमानजी की अद्भुत, विशाल मूर्ति और अतुलनीय सुन्दरता तथा दशरथनन्दन श्री रामचन्द्रजी की अलौकिक महानता और प्रभाव का स्मरण होता रहा॥2॥
On the way, he kept remembering the amazing, huge idol and incomparable beauty of Hanumanji and the supernatural greatness and influence of Dashrathanandan Shri Ramchandraji. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥