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mahabharat 3.152.10: भीमसेन का मन और आँखें पुष्पों से सजे पर्वत शिखरों पर टिकी थीं। द्रौपदी के अनुरोध ही उनकी जीविका का एकमात्र साधन थे और इसी अवस्था में वे बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.152: भीमसेनका सौगन्धिक वनमें पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 152: भीमसेनका सौगन्धिक वनमें पहुँचना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.152.10 
मज्जमानमनोदृष्टि: फुल्लेषु गिरिसानुषु।
द्रौपदीवाक्यपाथेयो भीम: शीघ्रतरं ययौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन का मन और आँखें पुष्पों से सजे पर्वत शिखरों पर टिकी थीं। द्रौपदी के अनुरोध ही उनकी जीविका का एकमात्र साधन थे और इसी अवस्था में वे बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे।
 
Bhimasena's mind and eyes were fixed on the flower-decorated mountain peaks. Draupadi's requesting words were his only source of sustenance and in this state he was moving very fast.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)