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mahabharat 3.151.15: भीमसेन के ऐसा कहने पर हनुमान्‌जी ने उनसे कहा - 'तुम मेरे भाई और मित्र हो, इसलिए मैं तुम्हें जो प्रिय है, वह अवश्य करूँगा।'॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.151: श्रीहनुमान‍्जीका भीमसेनको आश्वासन और विदा देकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 151: श्रीहनुमान‍्जीका भीमसेनको आश्वासन और विदा देकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.151.15 
एवमुक्तस्तु हनुमान् भीमसेनमभाषत।
भ्रातृत्वात् सौहृदाच्चैव करिष्यामि प्रियं तव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के ऐसा कहने पर हनुमान्‌जी ने उनसे कहा - 'तुम मेरे भाई और मित्र हो, इसलिए मैं तुम्हें जो प्रिय है, वह अवश्य करूँगा।'॥15॥
 
When Bhimasena said this, Hanuman said to him, 'You are my brother and friend, therefore I will certainly do what is dear to you.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)