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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 151: श्रीहनुमान्जीका भीमसेनको आश्वासन और विदा देकर अन्तर्धान होना
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श्लोक 15
श्लोक
3.151.15
एवमुक्तस्तु हनुमान् भीमसेनमभाषत।
भ्रातृत्वात् सौहृदाच्चैव करिष्यामि प्रियं तव॥ १५॥
अनुवाद
भीमसेन के ऐसा कहने पर हनुमान्जी ने उनसे कहा - 'तुम मेरे भाई और मित्र हो, इसलिए मैं तुम्हें जो प्रिय है, वह अवश्य करूँगा।'॥15॥
When Bhimasena said this, Hanuman said to him, 'You are my brother and friend, therefore I will certainly do what is dear to you.'॥ 15॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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