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mahabharat 3.150.50: हे कुन्तीपुत्र! मैंने तुम्हें राज्य के नियमों के विषय में यह कठोर उपदेश दिया है। इसका सार समझना अत्यन्त कठिन है। तुम्हें अपने धर्म के अनुसार विनम्रतापूर्वक इसका पालन करना चाहिए। ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.150.50 
एष तेऽभिहित: पार्थ घोरो धर्मो दुरन्वय:।
तं स्वधर्मविभागेन विनयस्थोऽनुपालय॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! मैंने तुम्हें राज्य के नियमों के विषय में यह कठोर उपदेश दिया है। इसका सार समझना अत्यन्त कठिन है। तुम्हें अपने धर्म के अनुसार विनम्रतापूर्वक इसका पालन करना चाहिए। ॥50॥
 
O son of Kunti! I have given you this strict advice on the rules of the state. It is very difficult to understand its essence. You should follow it humbly as per the divisions of your religion. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)