Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.150.47: अनेक कार्यों का आरम्भ करते समय अपने लोगों से तथा शत्रु पक्ष से भी परामर्श लेना चाहिए कि अमुक कार्य करने योग्य है या नहीं। साथ ही शत्रु पक्ष की शक्तियाँ तथा दुर्बलताएँ भी जानने का प्रयत्न करना चाहिए।॥47॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.150.47 
स्वेभ्यश्चैव परेभ्यश्च कार्याकार्यसमुद्भवा।
बुद्धि: कर्मसु विज्ञेया रिपूणां च बलाबलम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अनेक कार्यों का आरम्भ करते समय अपने लोगों से तथा शत्रु पक्ष से भी परामर्श लेना चाहिए कि अमुक कार्य करने योग्य है या नहीं। साथ ही शत्रु पक्ष की शक्तियाँ तथा दुर्बलताएँ भी जानने का प्रयत्न करना चाहिए।॥47॥
 
While starting many tasks, one should take advice from one's own people as well as the enemy's side as to whether a particular task is worth doing or not. Also, one should try to know the enemy's strengths and weaknesses.॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)