Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.150.43: भरतश्रेष्ठ! समस्त नीति और गुप्तचरों का मूल आधार मंत्रणा को गुप्त रखना है। उत्तम मंत्रणा या विचार से जो सफलता प्राप्त होती है, उसके लिए द्विजों से गुप्त रूप से मंत्रणा करनी चाहिए। 43॥ | mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतश्रेष्ठ! समस्त नीति और गुप्तचरों का मूल आधार मंत्रणा को गुप्त रखना है। उत्तम मंत्रणा या विचार से जो सफलता प्राप्त होती है, उसके लिए द्विजों से गुप्त रूप से मंत्रणा करनी चाहिए। 43॥
Bharatshrestha! The basic basis of all policies and spies is to keep the advice secret. For the success that is achieved through good advice or thoughts, one should consult secretly with the Dwijas. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥