श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.150.40 
तस्माद् देशे च दुर्गे च शत्रुमित्रबलेषु च।
नित्यं चारेण बोद्धव्यं स्थानं वृद्धि: क्षयस्तथा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
अतः राजा के लिए उचित है कि वह गुप्तचरों के माध्यम से देश और किले में अपने शत्रुओं और मित्रों के सैनिकों की स्थिति, वृद्धि और अवनति पर सदैव नजर रखे।40.
 
Therefore, it is appropriate for the king to always keep an eye on the condition, growth and decline of the soldiers of his enemies and friends in the country and the fort through spies. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)